जिला के बारे में

दंतेवाड़ा भारत की सबसे पुरानी बसाहटों में से एक है। जिन्होंने अपना जीवन जीने का तरीका नहीं बदला, अपने लोक नृत्य नहीं छोड़े, अपने मधुर लोक गीतों को अपने दिलों में बसाये रखा, जिनके बाशिंदों की मोहक मुस्कान हमारा दिल जीत लेती है। यह बसाहट दंतेवाड़ा है। इस शहर का नाम इस क्षेत्र की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के नाम से पड़ा। अनुश्रुति है कि दक्ष यज्ञ के दौरान गिरे सती के बावन अंगों में से एक यहाँ गिरा और इस शक्तिपीठ का निर्माण स्थापित हुआ।

जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा का गठन बस्तर जिले से पृथकीकरण के पश्चात २५ मई १९९८ को हुआ। जिले के वर्ष २००७ में हुए विभाजन के फलस्वरूप बीजापुर अलग जिले के रूप में पृथक हुआ और सुकमा वर्ष २०१२ में अलग जिले के रूप में|

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